IVF में ERA टेस्ट की क्या भूमिका है जानिए इम्प्लांटेशन कैसे बेहतर होता है

IVF उपचार में सफलता सिर्फ अच्छे भ्रूण (embryo) पर ही नहीं, बल्कि गर्भाशय की तैयारियों पर भी निर्भर करती है। कई बार भ्रूण स्वस्थ होने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता क्योंकि गर्भाशय उस समय इम्प्लांटेशन के लिए तैयार नहीं होता। ऐसे मामलों में ERA टेस्ट (Endometrial Receptivity Analysis) एक वैज्ञानिक समाधान के रूप में सामने आता है। यह टेस्ट यह निर्धारित करता है कि महिला का एंडोमेट्रियम भ्रूण को स्वीकार करने के लिए किस समय सबसे उपयुक्त है। एक अनुभवी दिल्ली के IVF केंद्र ( IVF Centre in Delhi ) इस टेस्ट के द्वारा से भ्रूण ट्रांसफर का सही समय पहचानकर IVF की सफलता दर को काफी हद तक बढ़ा सकता है।

ERA टेस्ट क्या है?

ERA टेस्ट एक आधुनिक जेनेटिक जांच है, जो यह पता लगाती है कि महिला का एंडोमेट्रियम (uterine lining) भ्रूण को स्वीकार करने के लिए किस समय सबसे अधिक तैयार होता है। इसे “विंडो ऑफ इम्प्लांटेशन” कहा जाता है। इस टेस्ट से डॉक्टर यह निर्धारित कर सकते हैं कि भ्रूण को ट्रांसफर करने का सबसे उपयुक्त समय कौन-सा है।

ERA टेस्ट कैसे किया जाता है?

  1. महिला के मासिक चक्र या IVF साइकल के दौरान एंडोमेट्रियम का एक छोटा सा सैंपल दिल्ली के अच्छे IVF केंद्र ( Best IVF Centre in Delhi ) के द्वारा लिया जाता है।

  2. इस सैंपल को लैब में जेनेटिक विश्लेषण के लिए भेजा जाता है।

  3. जांच के बाद पता लगाया जाता है कि एंडोमेट्रियम Receptive (स्वीकार करने योग्य) है या Non-Receptive (अस्वीकार करने योग्य)।

  4. रिपोर्ट के अनुसार अगली IVF साइकिल में भ्रूण ट्रांसफर का समय समायोजित किया जाता है।

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